शनिवार, 11 जून 2016

स्त्री पुरूष सम्बन्ध व गुण मिलान , ऋणात्मक व धनात्मक ऊर्जायें एवं कुंडिल‍िनी का शक्त‍ि प्रवाह - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

स्त्री पुरूष सम्बन्ध व गुण मिलान , ऋणात्मक व धनात्मक ऊर्जायें एवं कुंडिल‍िनी का शक्त‍ि प्रवाह
- नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
मनुष्य मात्र में या प्राणी मात्र में जिनमें से उन्हें छोड़कर जो कि उभयलिंगी होते हैं जैसे केंचुआ, या अमीबा , पैरामीश‍ियम या अन्य , शेष बाकी सभी में मातृ शक्त‍ि और पितृ शक्त‍ि , तथा तीनों गुण सतो गुण , रजो गुण, तमो गुण मौजूद रहते हैं , प्रत्येक प्राणी मात्र में इन गुणों की यह मात्रा का अनुपात घटा या बढ़ा हुआ रहता है और यह भी कि यह सदैव घटता बढ़ता रहता है , जो हर मनुष्य के आचरण व व्यवहार का निर्धारण व नियंत्रण कर उसके व्यक्त‍ित्व व गुणों के साथ उसके प्रभा मंडल का निर्माण करता है , वैसे सभी प्राणी या सारे मनुष्य भौतिक देह आधार पर एक जैसे ही नजर आते हैं , लेकिन केवल इन गुणों के अनुपात घटते बढ़ने से उनके स्वभाव , आचरण, व्यवहार व कर्म निर्धारित होकर उनके स्वरूप व व्यक्त‍ित्व का निर्माण होता है ।
बेशक यही ध्रुव सत्य है कि जिस पुरूष में जिस अनुपात में पौरूषीय गुण शक्त‍ि तथा सत , रज या तम गुण की जितनी मात्रा होगी , उसके ठीक एकदम विपरीत कम या ज्यादा गुण शक्त‍ि वाली स्त्री स्वत: ही उसकी ओर आकर्ष‍ित व सम्मोहित होकर अनजाने ही उसकी चाहने वाली होगी , यह चाहना किसी भी रूप में या किसी भी हद तक हो सकता है । लोग इसे सभ्यतावश अनेक नाम दे देते हैं '' पसन्द'' करना से लेकर बहिन, पत्नी, मेहबूबा, प्रेमिका, या अन्य दीगर किसी प्रकार का अनजान या मित्रता मात्र का गहरा रिश्ता कुछ भी हो किन्तु उनमें स्वाभाविक परस्पर एक अंदरूनी प्रीति व लगाव एवं ख‍िंचाव बना रहेगा ।
मसलन उदाहरण के रूप में यह संभव है कि जिस पुरूष में पौरूषत्व ज्यादा हो , और इसके विपरीत किसी स्त्री में स्त्रीत्व ज्यादा हो तो उनमें स्वाभाविक ही सम्मोहन व आकर्षण हो जायेगा , इसी प्रकार स्त्रीत्व गुणों से संपन्न पुरूष के प्रति पुरूष गुण से संपन्न नारी के बीच स्वाभाविक सम्मोहन , आकर्षण व प्रीति होगी ।
अक्सर जहॉं समलिंगी सम्बन्ध या विवाह होते हैं , वहॉं इन्हीं गुणों व स्वरूपों का करिश्माई कमाल होता है , भगवान शंकर का अर्धनारीश्वर स्वरूप या श्री कृष्ण का या अर्जुन का स्त्रीवेश धारण करना इसे निरूपित व परिभाष‍ित कर इसकी विस्तृत व्याख्या करता है ।
एक नपुंसक लिंग या उभयलिंगी यदि कोई प्राणी शुरूआत में या जन्म से न हो लेकिन वह यदि कुंआरा रहने या ब्रह्मचर्य का व्रत धारण कर ले या समलिंगी सम्बन्ध कर ले या समलिंगीं विवाह कर ले तो , स्त्री पुरूष संबंधों से या तंत्र में भैरवी शक्त‍ि या भैरवी चक्र जागरण के बाद सहस्त्राधार तक कुंडिलिनी शक्त‍ि को ले जाकर '' ऊँ'' की प्राप्त‍ि का मार्ग पूरी तरह बदल जाता है और फिर ऐसे मनुष्य के अंदर स्वयं ही दोनों शक्त‍ियां यदि भैरव एवं भैरवी पैदा हो जायें तो ही वह साधना के अंतिम चक्र तक जाकर समाध‍ि अवस्था तक पहुँच पायेगा , अन्यथा विनष्ट होकर उसकी सारी शक्त‍ि ऋणात्मक होकर ऊर्ध्व गति प्रवाह के बजाय अधोगति प्रवाह में होने लगेगी और वह निम्नमनतर गति व ऋणात्मक होता जायेगा , आसुरी तत्व बढ़ते जायेंगें अंतत: अंतिम गति में उसका स्वरूप एवं अगली जन्म निम्न या क्षुद्र या किसी अन्य नीच योनि में होगा और उसे बेशक मनुष्य योनि में पुनर्जन्म लेना संभव नहीं होगा ।
स्त्री पुरूष चाहे वह दांपत्य जीवन में पति पत्नी हों , या प्रेमी प्रेमिका हों , मेहबूब व मेहबूबा हों या लिव इन रिलेशन में हों , उन्हें परस्पर ऊर्जायमान व तेजस्वी होने का अनुभव व अहसास यदि हो अर्थात सकारात्मक या धनात्मक ऊर्जा प्रवाह व समृद्धि , चेतना की परस्पर अनुभूति हो तो ही संबंध या रिश्ता जारी रखना चाहिये , अन्यथा इसके विपरीत यदि किसी भी प्रकार से पारस्परिक संबंधों से ऋणात्मकता या अधोगति या तनाव या चिन्ता या विकारग्रस्तता या खेद या ऋणत्मक ऊर्जा प्रवाह या समृद्धि व चेतना की हीनता या हृास या कमी अनुभव या महसूस हो तो , ऐसे रिश्ते या संबंध तुरंत समाप्त कर देने चाहिये और आगे और ज्यादा होने वाल अधोगति को जारी नहीं रखना चाहिये ।
जन्म कुण्डली मिलान में , वर व वधू की जन्म कुण्डली मिलान करना एक बहुत उत्तम व उचित व्यवस्था है , किन्तु यह पूरी तरह से एक गण‍ितीय व वैज्ञानिक विध‍ि व रीति है , कम ज्ञान वाले या अधूरे ज्ञान वाले या अगण‍ितीय या अवैज्ञाानिक ज्योतिषी से ऐसा जन्म कुण्डली विवाह मिलान नहीं कराना चाहिये । वरना सब कुछ उल्टा पुल्टा हो जायेगा ।
मसलन कुण्डी मिलान में कई गुणों का मिलान किया जाता है , जैसे वर्ण , योनि एवं नाड़ी आदि ..... इनके सबके अपने अपने अर्थ एवं महत्व हैं , कुल मिलाकर जितने गुण मिलान शास्त्रीय रीति से वर वधू के मिलान किये जाते हैं , एक उत्तम गण‍ितज्ञ व वैज्ञानिक ज्योतिषी उससे ज्यादा आगे जाकर अन्य और भी कई गुणों का मिलान कर एक सटीक व उत्तम विवाह मिलान कर सकता है या स्पष्टत: विवाह लिान को रिजेक्ट कर देगा । अत: देख भाल कर चालिये, यही में सबकी खैर , वरना चले थे मोहब्बत करने, पर हो गया उनसे वैर ..... ( विशेष कृपया उन लोगों से विशेष रूप से उनसे सवाधान रहें जो यह गारण्टी देते हैं कि प्रमिका का वशीकरण करा दूंगा , या आकर्षण करा दूंगा, खोया प्रेम पुन: वापस पायें , मनचाही संतान पायें वगैरह , आदमी की खुद की कोई गारण्टी नहीं होती कि आधे घण्टे के भीतर उसके खुद के साथ क्या होने वाला है , लिहाजा दूसरों को चैलेन्ज करके गारण्टी देने वाले खुद को खुदा कहने वाले या हनुमान जी का सिद्ध या किसी अवतार का सिद्ध बताने वाले ढोंगीं पाखण्डीयों से बच कर रहें , हो सकता है , कि आधे घण्टे में कुदरत या खुदा उन्हीं का कुछ और ही अंजाम लिख रही हो अत: अपना धन व समय एवं इज्जत बचा कर रखें , सोच समझ कर ही इसे खर्च करें ) हम नाम नहीं बताना चाहते , कुछ ज्योतषी व तंत्र के विशेषज्ञ हैं , ऐसे लोग भी हैं जो पूरे शहर भर में हमारे यहॉं सबकी जन्म कुण्डलियां बनाते हैं , कुण्डलियां मिलान करते हैं और पूजा पाठ हवन आदि तंत्र क्रियायें करते हैं , लेकिन खुद के लिये , अपने स्वयं के परिवार के लिये या किसी मोटे ग्राहक की कुंडली बनवाने या कुण्डली मिलान करवाने या किसी तंत्र क्रिया या हवन आदि , पूजा पाठ या अनुष्ठान के लिये वे हमारे पास आते हैं और हमसे यह सब करवाते हैं  , खैर यह उनका धंधा है , चलता भी खूब है , कमा भी खूब रहे हैं , चाहे कोई बर्बाद हो या आबाद हो , उन्हें बस अपने धंधे के चलने से काम .... खैर यह संसार है , इसी तरह चलता है   - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

शनिवार, 16 अप्रैल 2016

अब फेसबुक के जरिये हर चीज व हर सेवा खरीदिये बेचिये , फेसबुक बना ई व्यापार और ऑनलाइन खरीदी बिक्री का सबसे बड़ा माध्यम

अब फेसबुक के जरिये हर चीज व हर सेवा खरीदिये बेचिये , फेसबुक बना ई व्यापार और ऑनलाइन खरीदी बिक्री का सबसे बड़ा माध्यम
- नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
व्हाटस एप्प द्वारा एण्ड टू एण्ड सिक्योरिटी देने के बाद , सारी सामग्री एनक्रिप्शन कर देने के बाद अब जहॉं खुद व्हाटस एपप कंपनी भी किसी के द्वारा किसी को या किसी ग्रुप के सदस्य न होते हुये उस सामग्री को पढ़ नहीं सकती , वहीं अब पुलिस व साइबर सेल की पकड़ से भी व्हाटस एप्प बाहर निकल गया है , इसके साथ ही व्हाटस एप्प अकाउंट हैक करने वालों और दूसरे के मोबाइल नंबर से अकाउण्ट ऑपरेट करने वालों और हैकिंग की जद से भी व्हाटस एप्प बाहर निकल गया है । कंपनी द्वारा इसके लिये व्हाटस एप्प एप्लीकेशन के लिये अपडेटस विगत सप्ताह मंगलवार को जारी कर , मंगलवार से ही यह सुविधा लागू कर दी गयी थी ।
फेसबुक ने भी अपनी सिक्योरिटी बढ़ाते हुये , डाटा एन्क्र‍िप्शन के साथ ही ई व्यापार और ऑन लाइन खरीदी बिक्री की बहुत बड़ी अंतर्राष्ट्रीय सेवा शुरू की है , अब पूरे विश्व में कहीं से भी कुछ भी फेसबुक के जरिये खरीद और बेच सकते हैं ।
फेसबुक पर कुछ खरीदने बेचने के लिये , ई व्यापार या ऑनलाइन खरीदी बिक्री के लिये आपको फेसबुक की निम्न लिंकों पर जाकर , निम्न खरीदी बिक्री समूहों का सदस्य बनना होगा , इसके साथ ही आप अपने घर से बैठकर ही या अपने मोबाइल फोन के जरिये ही जो कुछ भी आपके पास बेचने के लिये या खरीदने के लिये हो , खरीद बेच सकते हैं , यहॉं तक कि पूरे विश्व में जहॉं भी जो कुछ सस्ता , अच्छा या दुर्लभ से दुर्लभ चीज या वस्तु या सेवा उपलब्ध करा सकते हैं या बेच सकते हैं या खरीद सकते हैं ।
फेसबुक के इन खरीद बिक्री समूहों के लिये निम्न में से किसी भी समूह को दोनों समूहों को ज्वाइन कर लें , इसके बाद आपके लिये फेसबुक पर खरीदने एवं बिक्री करने का  आप्शन खुद ब खुद खुल जायेगा , और पैसे सीधे आपके बैंक खाते में पहुँचने लगेंगें ।
http://www.facebook.com/groups/Gwaliorsale/
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http://www.facebook.com/groups/evaapar/

Narendra Singh Tomar " Anand"

शुक्रवार, 20 नवंबर 2015

फिर से ग्रहों के बदलाव का व उलटफेरी का दौर शुरू होगा, और फिर से बदलेंगीं चालें , राहें मंजिलें



फिर से ग्रहों के बदलाव का व उलटफेरी का दौर शुरू होगा, और फिर से बदलेंगीं चालें , राहें मंजिलें
गीत वह सुनिये या गाईये , जिसका असर ऊपर आसमां से नीचे पाताल तलक हो , शादी विवाह की बुनियाद है प्यार व विश्वास, और प्यार व विश्वास की बुनियाद है मोहब्बत , मोहब्बत करने के लिये दिमाग की नहीं अलबत्ता दिल की बहुत जरूरत होती है
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’

आज के दोनों ही विषय एक दूसरे से जुदा और अलहदा हैं , मगर दोनों ही आज के दौर की निहायत जरूरत हैं । चलिये दोनों ही विषयों को आज उठाते हैं ।
ग्रहों का फेरबदल और बदलाव , साथ ही बदलेंगीं तमाम चालें
आसमानी ग्रहों के तमाम परिवर्तन हालांकि बड़े परिवर्तन तो जनवरी के महीने में और मार्च 2016 के महीने में होंगें , लेकिन हल्के व छोटे परिवर्तनों का दौर अभी नवंबर के 2015 के ही दरम्यां शुरू हो जायेगा ।
वर्तमान में ग्रहों की विचित्र स्थति यह है कि मंगल , शुक्र व राहू तीनों एक साथ एक ही राशी में चल रहे हैं यानि कन्या राशी में ।
ग्रहों की यह सूरत करीब 9 प्रकार के योगों को जन्म देती है, यह निर्भर करता है कि किसी मात्रा या अंश या ताकत कितनी है और कौन कितना बलवान या कमजोर चल रहा है ।
कीचड़ योग दरअसल यह मूल योग है, आपकी जन्मकुंडली में यदि यह तीनों साथ आ जायें तो जिस जगह बैठेंगें उस जगह को कीचड़ से भर देंगें , अब यह कीचड़ कैसी होगी , गंदी बदबूदार, काली, या कितनी सूखी , कितनी बदबू या कितनी काली या बहुत ज्यादा भारी या बहुत ज्यादा हल्की फुल्की यह निर्भर करता है आपकी जन्मकुंडली में एक साथ बैठ जाने पर , किस भाव में कितना बलवान या कमजोर होकर कोई ग्रह बैठा है ।
खैर यह योग अभी 30 नवम्बर से टूट जायेगा , चूंकि राहू इस समय कमजोर हालत में होकर महज 3 अंश पर हैं इसलिये सूरत ज्यादा घातक या नुकसानदेह नहीं है , मगर नाली तो नाली है , काली है, कीचड़ है, कन्या राशी में होकर इस समय बह रही है या गुजर रही है ।
शुक्र 30 नवंबर को राशी बदलकर तुला में यानि खुद के घर अपनी ही राशी में प्रवेश करेंगें । जबकि मंगल दिसम्बर में 23 दिसम्बर को राशी बदलेंगें और तुला राशी में प्रविष्ट होंगें । यानि कि 30 नवंबर के बाद कीचड़ पूरी तरह से सूख जायेगा , और महज काला सूखा कीचड़ या काली मिट्टी पड़ी रह जायेगी ।
कुछ वक्त से सर्प दिखाई देने के सपने जिन लोगों को आ रहे होंगें , वह या तो अब बंद हो जायेंगें या सिर्फ मरे हुये सर्प मिट्टी में गड़े हुये या उस पर छोटे मोटे बच्चा रूप में रेंगते चलते नजर आयेंगें जिन्हें महज तिनकों से मार कर मिट्टी में दबा देने का दृश्य नजर आने लगेगा । दिसंबर में ही सूर्य के उत्तरायण होते ही सर्प स्वप्न एकदम से आने बंद हो जायेंगें और अब तक जो जो भी देखा होगा वह जनवरी के बाद फरवरी 2016 से हकीकत में तब्दील होना शुरू हो जायेगा । 6 दिसंबर से बुध का धनु राशी में प्रवेश होगा , वहीं सूर्य 16 दिसंबर से धनु राशी में प्रवेश करेंगें ।
ग्रहों की बड़ी उलटफेर जनवरी में 8 जनवरी 2016 से शुरू होगी , गुरू सिंहस्थ रहकर तकरीबन राशी बदलते बदलते एकदम से मृतप्राय: से होकर  ही वक्री हो जायेंगें । और पुन: सिंह राशी में ही टिके रहेंगें , गुरू की यह वक्र गति वह भी उस वक्त जब उन्हें राशी बदलकर कन्या राशी में जाना है , एकदम से उल्टा वापस सिंह राशी में लौटना और वक्री चाल के तमाम अर्थ व महत्व होंगें ।
दूसरा बड़ा परिवर्तन 29 जनवरी 2016 से होगा जब राहू और केतु राशी बदलेंगें । राहू का प्रवेश सिंह राशी में होगा और केतु का प्रवेश कुम्भ राशी में होगा ।
तीसरा बड़ा ग्रह परिवर्तन मार्च 2016 के महीन में उस वक्त होगा जब शनि 25 मार्च 2016 को वक्री होंगें ( वर्तमान में शनि 13 नवंबर 15 से अस्त चल रहे है और 16 दिसंबर 15 तक अस्त रहकर 16 दिसंबंर को ही उदित होंगें ) उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर को ही सूर्य यानि शनि के पिता राशी बदलेंगें ।     
शादी की बुनियाद है प्यार व विश्वास , और प्यार व विश्वास की बुनियाद है मोहब्बत , मोहब्बत के लिये दिमाग नहीं दिल चाहिये
यह विषय सीधे सीधे हमारे पूर्ववर्ती आलेख मंत्र कुमंत्र , शब्द , स्वर व ध्वनि व कुदरत व कायनात से गुरती हर प्रकार की तरंग से जुड़ा हुआ या उसका ही एक अंग है ।
शादी विवाह या प्रेम पारस्परिक जुड़े हुये व सालग्नि‍क विषय हैं । जिन पर पृथक नजरिया पृथक्कीयकरण को , वियोग को या तलाक को या बन्य किसी विकट व अप्रिय स्थति को जन्म देता है ।
पृथक्करण, विरह , वियोग, तलाक या अन्य अप्रिय हालात के योग न केवल जन्मकुंडली में ह मौजूद रहते हैं अपितु उस वातावरण या हालातों को भी पैदा कर देते हैं जिनसे यह सब अप्रिय हालात आसानी से पैदा हो जायें ।
इन सबका असर आने वाली पीढ़ी या संतान पर भी मनोवैज्ञानिक रूप से या परिस्थतिजन्य होकर पड़ता है जिसके आने वाले दौर या आने वाले वक्त में परिणाम भीषण व भयंकर ही होते हैं । खैर फिलहाल चलिये सुनिये एक मधुर पुराना गीत ब्राडकास्ट करते हैं , उसे सुनिये , ऐसे ही मधुर गीत व संगीत मंत्र की श्रेणी में आते हैं , आजकल इस प्रकार के गीतों का आना व बनना बेशक बंद हो गया है और गीत संगीत युक्त मंत्र का स्थान शोरगुल , चीख चिल्लाहट, झल्लाहट व मानिसिक विकृतियुक्त या मानसिक विकृतियां पैदा करने वाले व सामाजिक संरचना को नष्ट भ्रष्ट करने वाले तथा कथि‍त गीत संगीत ने ले लिया है , मगर हमारी सलाह है कि न कभी इस प्रकार आसुरी व कुमंत्र युक्त गीत संगीत को सुनें और न ऐसी फिल्मों को ही देखें । वरना अंजाम तय है और परिवेश व हालात भी तदनुसार ही बन जायेंगें । फिलवक्त एक मंत्रमय मधुर गीत ब्राडकास्ट कर रहे हैं ..... यह आलेख श्रंखला जारी रहेगी .... क्रमश: अगले अंक में 

सोमवार, 29 जून 2015

तंत्र एवं मंत्र संबंधी उपयोगी जानकारी - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

तंत्र एवं मंत्र संबंधी उपयोगी जानकारी
- नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
मंत्र भेद - मंत्र मात्र के पॉंच प्रकार के भेद होते हैं
1. पिण्ड  2. कर्तरी 3. बीज  4. मन्त्र  5. माला मंत्र
मंत्र स्वरूप प्रकार एवं प्रयोग भेद -
1. नम: वाले मंत्र नपुंसक मंत्र कहे जाते हैं
2. फट् वाले मंत्र पुंंलिंग मंत्र कहे जाते हैं
3. स्वाहा वाले मंत्र स्त्री लिंग मंत्र कहे जाते हैं
स्वधा , वषट और वौषट तदनुसार क्रमित किये जाते हैं
हूँ फट या हुंकार तथा फटकार का मंत्र में एक साथ प्रयोग पगत्येक सामान्य तांत्रिक या साधक को नहीं करना चाहिये , फट मंत्र में साध्य देवता या देवी को फटकार लगायी जाती है , जबकि हूँ फट यानि हुंकार के साथ फटकार में बहुत बुरी तरह से डांट लताड़ व फटकार रहती है , सामान्य साधक या तांत्रिक जिसका तंत्र या मंत्र पर बहुत उच्च कोटि का नियंत्रण या बहुत उच्चतम कोटि की शक्ति या साधना या सिद्धि न हो वे फट मंत्रों का प्रयोग न करें , वरना विनाश या सर्वनाश सुनिश्च‍ित है ।
मंत्र का जप सप्तांग सहित करना चाहिये -
ऋष‍िश्छंदश्च बीजं च कीलकं शक्त‍िरेव च ।
अंगन्यासस्तथा ध्यानं मंत्रांगानां च सप्तकम ।।
वैदिक, पौराण‍िक, तांत्रिक, एवं सावर यह चार प्रकार के मंत्र जिसके सींग हैं, कादि , हादि सादि उपासना पद्धतियां जिसके तीन चरण पाद हैं, वैदिक , शैव, वैष्णव, दक्ष‍िण, वीर, वाम, कौल ये सात प्रकार के सात आचार ही जिसके सात हाथ हैं , जीवात्मा में प्रविष्ट यही तंत्र मंत्र है ।
सावर मंत्रों में सावधानी -
सावर मंत्र आसानी से और बहुत जल्दी असरकारक होते हैं , तथा सिद्ध भी शीघ्र होते हैं किंतु किंचित भी बिन्दुमात्र भी त्रुटिमात्र होने पर यह अति शीघ्र व तुरंत ही साधक का या उस प्रयोग करने वाले का या तांत्रिक का विनाश या सर्वनाश भी कर देते हैं ।  अत: सावर मंत्र जाप या प्रयोग में बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिये ।
किसी गृहस्थ के लिये या अन्य किसी तांत्रक के लिये वाम मार्गी पद्धति की साधना अति शीघ्र सिद्ध होने वाली व तुरंत फलदायी होती है किंतु तंत्र का विशेष नियम यह है कि , दक्ष‍िण मार्ग से यदि साधना कर रहे हों तो स्वयं की समर्पिता पतिव्रता पत्नी का प्रयोग करें , और यदि वाम मार्ग से साधना कर रहे हैं तो कुल नायिका का प्रयोग करें , गृहस्थ मनुष्य के लिये दक्ष‍िण मार्गी साधना सर्वोत्म है , और स्वयं की पत्नी का प्रयोग ही निर्दिष्ट है ।
अन्य प्रकार के प्रयोगों में श्री कुल एवं काली कुल दोनों ही कुल परंपराओं में यही विधान प्रावधान सम्यक है, किंतु कतिपय विशेष प्रयोगों में दासी का, या अन्य विशेष उल्लेख की गईं व वर्ण‍ित स्त्रीयों का ही प्रयोग किया जाना चाहिये ।
साधना में ''योगनी'' के रूप में और ''भैरवी'' के रूप में स्त्रीयों के प्रयोग किये जाने चाहिये , उच्च कोटि की बड़ी साधना पद्धतियों में रतात्सव पुरूष व स्त्री ( विपरीत रतात्सव सूरत में) केवल एक ही व्यक्त‍ि मंत्र जाप करता है  , जबकि अन्य उच्च कोटि की ही साधना पद्धतियों में दोनों को ही उसी स्थि‍ति में मंत्र जाप निरंतर करना होता है , किंतु इसकी अन्य सुस्थापित विधान व शर्तें हैं , तथा दोनों ही ऊर्ध्ववेत्ता एवं अंतिम मंत्र जाप तक स्थ‍िर रतात्सव एवं नि:स्ख्लि‍त रहने चाहिये , तदुपरांत नित्य या साधना अवधि पूरी होने तक रोजाना पूर्ण मंत्र जाप साधना उपरांत प्राप्त स्त्री रज व पुरूष वीर्य का मिश्रण वाम मार्ग में वर्ण‍ित विधि‍ एवं पद्धति द्वारा अनिवार्यत: उपयोग किया जाना चाहिये । अन्यथा साधना व्यर्थ व निष्फल जायेगी ।  दक्ष‍िणमार्ग में स्व पत्नी या स्व स्त्री या स्व पत्नीयों या स्व स्त्रीयों के संबंध में भी यही विधान तय है ।   बिना संपूर्ण विधान व प्रावधान जाने बगैर या उचित गुरू के मार्गदर्शन बगैर रतात्सव संबंधी साधना किसी को भी भूलकर नहीं करना चाहिये , क्योंकि इसमें अनेक क्रम , विध‍ि,  कलाओं व स्ववरूपों , धारण व ग्रहण करने योग्य या ग्राह्य अग्राह्य आदि अनेक उपचार उपासना के विविध सुनिश्च‍ित तरीके होते हैं , अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि या विनाश या सर्वनाश हो जाता है - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''